शनिवार, 21 फ़रवरी 2009

आँख का आंसू समझ कर तुम भी मुझको भूल जाना
हैं हजारों लोग किसको याद रखता है ज़माना

इश्क का सौदा हमेशा आंसुओं के मोल होगा
लाख मुस्कानें लुटाओ बदले में आंसू है पाना

इस जहाँ से उस जहाँ तक कोई भी अपना नहीं
यूँ तो कहने को सभी से है हमारा दोस्ताना

हाँ नही होंगे तो क्या हमसे हजारों लोग होंगे
इस सराय- -फानी में होता रहेगा आना जाना

रत -दिन मेरे साथ रह कर वो समझा दर्दे दिल
मैंने भी समझा मुनासिब दर्द को हँस के छिपाना .

सीमा

11 टिप्‍पणियां:

  1. आँख का आंसू समझ कर तुम भी मुझको भूल जाना
    sundar abhivyakti...badhai

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  2. हाँ, नही होंगे तो क्या हमसे हजारों लोग होंगे
    इस सराए-फानी में होता रहेगा आना-जाना....

    वाह ! दिल के सच्चे जज़्बात की ऐसी खूबसूरत तर्जुमानी ....
    हर शेर में सदाक़त और पुख्तगी झलक रही है .....
    मुबारकबाद कुबूल फरमाएं . . . . .
    और ये आपकी इस उम्दा ग़ज़ल के लिए -----

    "टीस दिल की खो chuki hai इन लबों की बेबसी में ,
    दर्द ख़ुद ही सीख लेगा आंसुओं में जगमगाना ..."

    ---मुफलिस---

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  3. उसने दर्दे दिल न समझा मैंने अपना गम छुपाया अति सुंदर /अपने सब है लेकिन वास्तव में अपना कोई नहीं /सराए फानी- एक तो सराय उस पर फानी अच्छा शब्द चयन /मुस्कान के बदले आंसू -एक हकीकत /सही बात है ज़माने ने कब किसको याद रखा है

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  4. रात -दिन मेरे साथ रह कर वो न समझा दर्दे दिल
    मैंने भी समझा मुनासिब दर्द को हँस के छिपाना .
    ......एक पुराने ग़ज़ल का शेर याद आ गया --उम्र भर भी साथ रह कर वो न समझा दिल की बात ..... सुन्दर !!!

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  5. Police Waale Bhi Likhte Hain. WO Bhi Itna Shaandaar...waah waah waah waah. aap badhayi ki patra hain...kisi aur police wale ka blog ho to please btayen...

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  6. बेहद खूबसूरत रचना. सुन्दर ग़ज़ल के लिए बधाई.

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  7. सीमा जी बहुत सुन्दर रचना है, आपने पूरा समा बाँध दिया!

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  8. आँख का आंसू समझ कर तुम भी मुझको भूल जाना
    हैं हजारों लोग किसको याद रखता है ज़माना ।
    बिल्कुल सही कहा है आपने इस जमाने में कौन किसे याद रखता है मतलब निकल जाने के बाद कोई किसी को याद नही ऱखता है । लाजबाब पेशकश

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  9. dekhta hu kab talak ye haar hai
    her daav par jeet ka etwaar hai
    omprakash seema ji likhte raho

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